जौनपुर/बरसठी। विकासखंड बरसठी के ग्राम पंचायत गोरापट्टी में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में 2-3 साल पहले कूड़ा निस्तारण के लिए बनाया गया कूड़ाघर आज तक उपयोग में नहीं आ सका है। निर्माण के बाद से ही कूड़ाघर बंद पड़ा हुआ है, जिससे सरकारी धन से तैयार की गई व्यवस्था महज शोपीस बनकर रह गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कूड़ा उठाने और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकारी स्तर पर कूड़ा गाड़ी भी उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन वर्तमान में वह कूड़ा गाड़ी कहां है, इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के इस्तेमाल के लिए आई सरकारी कूड़ा गाड़ी भी गायब है और जिम्मेदारों की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
कूड़ाघर बना, लेकिन इस्तेमाल क्यों नहीं?
ग्राम पंचायत में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था के लिए कूड़ाघर का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के वर्षों बाद भी इसके संचालन की व्यवस्था जमीन पर नजर नहीं आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कूड़ाघर का इस्तेमाल ही नहीं होना था तो उसके निर्माण पर खर्च किए गए सरकारी धन का उद्देश्य क्या था?
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने के कारण जगह-जगह गंदगी फैलने की स्थिति बनी रहती है। इससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी कूड़ा गाड़ी कहां गई?
मामले में सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत के लिए उपलब्ध कराई गई कूड़ा गाड़ी को लेकर है। ग्रामीणों का दावा है कि कूड़ा उठाने के लिए आई गाड़ी अब गांव में दिखाई नहीं देती। आखिर सरकारी संसाधन के रूप में उपलब्ध कराई गई कूड़ा गाड़ी कहां है और उसका इस्तेमाल किसके निर्देश पर हो रहा है, यह जांच का विषय है।
प्रधान की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पंचायत में विकास और स्वच्छता के नाम पर सरकारी धन खर्च तो किया जा रहा है, लेकिन योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से ग्राम पंचायत गोरापट्टी में बने कूड़ाघर, कूड़ा गाड़ी और स्वच्छता व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी धन से बनाई गई संपत्ति का इस्तेमाल नहीं हो रहा है या सरकारी वाहन का निर्धारित कार्य में उपयोग नहीं किया जा रहा है, तो पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत और आरोपों पर विकासखंड स्तर से क्या कार्रवाई होती है और सरकारी धन से तैयार की गई स्वच्छता व्यवस्था को आखिर कब जमीन पर उतारा जाता है।
2-3 साल पहले लाखों की लागत से बना कूड़ाघर आज भी बंद, ग्रामीणों ने प्रधान पर मनमानी और सरकारी धन के दुरुपयोग का लगाया आरोप















