{विजय सिंह} बलरामपुर जिला मुख्यालय के जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में विशाल कुमार गुप्ता को न्यायालय से दो अलग-अलग स्तरों पर राहत मिलने का मामला सामने आया है। मामले में एक ओर जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा धोखाधड़ी एवं कूटरचना के आरोपों में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने के आदेश को सत्र न्यायालय ने बरकरार रखा, वहीं दूसरी ओर इसी विवाद से संबंधित रिट अपील को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने भी खारिज कर दिया है। विशाल कुमार गुप्ता ने जानकारी दी है की
ग्राम दहेजवार निवासी द्वारिका प्रसाद गुप्ता द्वारा खसरा नंबर 221, रकबा 0.18 हेक्टेयर भूमि का विक्रय विशाल कुमार गुप्ता के पक्ष में 20 मई 2019 को किया गया था। विशाल गुप्ता का आरोप है कि उक्त भूमि के संबंध में उन्हें निजी स्वामित्व की जमीन बताकर राशि प्राप्त की गई और बाद में भूमि के दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया।
कोर्ट ने दर्ज किया आपराधिक प्रकरण
मामले में प्रस्तुत शिकायत एवं उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बलरामपुर ने 10 फरवरी 2025 को द्वारिका प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 एवं 468 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया। यह प्रकरण क्रमांक 222/2025 के रूप में दर्ज हुआ।इस आदेश को द्वारिका प्रसाद गुप्ता द्वारा प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रामानुजगंज के समक्ष पुनरीक्षण याचिका क्रमांक 09/2025 के माध्यम से चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने 26 मई 2026 को पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट ने रिट अपील की खारिज
मामले से जुड़े दूसरे पक्ष में द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता एवं अलीमुद्दीन की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी क्रम में अलीमुद्दीन द्वारा दायर रिट अपील क्रमांक 871/2026 पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की मुख्य न्यायाधीश ने 18 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद अपील खारिज कर दी।
श्री गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षकार के वैध कानूनी अधिकार और मामले में उसकी स्थिति पर विचार किया। हालांकि, न्यायालय के आदेश में यह भी उल्लेखित है कि संबंधित भूमि वर्ष 1987 में द्वारिका गुप्ता को आवंटित हुई थी और 20 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद वे भूमिस्वामी माने गए। न्यायालय के अनुसार वर्ष 2019 में विवादित बिक्री के समय भूमि हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं थी।
अधिवक्ता सौरभ साहू की भूमिका का किया उल्लेख
विशाल कुमार गुप्ता ने अपने बयान में मामले की न्यायिक पैरवी करने वाले अधिवक्ता सौरभ साहू के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय में तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उनका पक्ष रखा गया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में राहत मिली।
विशाल गुप्ता ने जताया न्यायपालिका के प्रति आभार
विशाल कुमार गुप्ता ने कहा कि जमीन विवाद के चलते उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने उच्च न्यायालय बिलासपुर, सत्र न्यायालय रामानुजगंज तथा संबंधित न्यायिक अधिकारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।उन्होंने कहा कि दोनों न्यायालयों के आदेशों से उनके पक्ष को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। उनका कहना है कि आगे भी वे न्यायालय के आदेशों के अनुरूप विधिवत कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।
मामले में सामने आए दोनों न्यायिक आदेशों के बाद अब संबंधित पक्षों के बीच जमीन विवाद को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया और फर्जीवाड़ा करने वालों पर कब तक कारवाई चालू होगा जो नगर के चौक चौराहों पर चर्चा में हैं…..















