बलरामपुर {विजय सिंह} सोशल मीडिया पर रील बनाकर सुर्खियां बटोरने का चलन अब शासकीय कार्यालयों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। बलरामपुर जिले में विभिन्न शासकीय कार्यालयों और कार्यालय परिसरों से जुड़े कुछ रील एवं वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है। इनमें संयुक्त जिला कार्यालय के भीतर बनाए गए वीडियो से लेकर कलेक्टर कार्यालय परिसर में बनाए गए रील वीडियो शामिल बताए जा रहे हैं।
इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह–तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सरकारी कार्यालय आम लोगों की समस्याओं के निराकरण और प्रशासनिक कार्यों के संचालन के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे में कार्यालय परिसर में रील बनाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित कर्मचारियों को इस तरह के वीडियो बनाने की अनुमति थी और क्या इन गतिविधियों से कार्यालयीन कार्य प्रभावित हुआ।
कलेक्टर कार्यालय परिसर में रील को लेकर भी चर्चा
कलेक्टर कार्यालय परिसर से कर्मचारियों के रील बनाए जाने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आ रही है। प्रशासनिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले कार्यालय परिसर में इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद लोगों की नजर अब इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले को किस तरह देखता है।
हालांकि वायरल वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाए गए, उस समय संबंधित कर्मचारी ड्यूटी पर थे या अवकाश पर, तथा वीडियो बनाने के लिए विभागीय स्तर पर कोई अनुमति या दिशा-निर्देश थे अथवा नहीं—इन बिंदुओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारियों के वीडियो भी चर्चा में
रील बनाने का चलन केवल सामान्य शासकीय कार्यालयों तक सीमित होने की चर्चा नहीं है। पुलिस विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आ रही है। वर्दी अथवा कार्यालय से जुड़े स्थानों पर बनाए गए वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर अलग–अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
हालांकि इन वीडियो के निर्माण का समय, स्थान, संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी की स्थिति और वीडियो बनाने के उद्देश्य की पुष्टि आवश्यक है।
सोशल मीडिया और सरकारी जिम्मेदारी के बीच संतुलन जरूरी
सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति और मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। शासकीय कर्मचारी भी निजी समय में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन कार्यालयीन समय, सरकारी परिसर, वर्दी अथवा शासकीय संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में संबंधित विभाग के नियम और दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
यदि निजी गतिविधियां कार्यालयीन कार्य को प्रभावित नहीं करती हैं तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन यदि रील बनाने के कारण शासकीय कार्य प्रभावित होता है या कार्यालय की गरिमा पर सवाल उठते हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा मामले की वास्तविक स्थिति की जांच की जा सकती है।
वायरल वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच जरूरी
सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के वायरल होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वीडियो कब बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाले कर्मचारी उस समय ड्यूटी पर थे या नहीं और वीडियो किस उद्देश्य से बनाया गया था। इसलिए मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए वीडियो की तारीख, स्थान और परिस्थितियों की जांच जरूरी है।फिलहाल शासकीय कार्यालयों और पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारियों के रील वाले वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इन वायरल वीडियो को लेकर कोई जांच करते हैं या कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। समीक्षा न्यूज़ वायरल वीडियो की सत्यता अथवा वीडियो में दिखाई दे रहे कर्मचारियों के संबंध में किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करता।















