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शाकंभरी योजना में करोड़ों के घोटाले का आरोप, पुराने कुओं को नया बताकर सब्सिडी लेने की शिकायत

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{विजय सिंह}बलरामपुर जिले में कृषि विभाग की शाकंभरी योजना के तहत कूप निर्माण और पंप वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। रामानुजगंज विकासखंड के ग्राम कमलपुर निवासी उत्तम कुमार मिर्ली ने कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपकर योजना में व्यापक भ्रष्टाचार, पुराने कुओं को नया बताकर सब्सिडी लेने और एक ही वेंडर के माध्यम से लाखों रुपये की खरीदी किए जाने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।शिकायत में कार्यालय उपसंचालक कृषि, बलरामपुर से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों के अध्ययन में कई ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

एक ही वेंडर से खरीदारी का आरोप

शिकायत के अनुसार, योजना के तहत किसानों को पंजीकृत दुकानों से पंप खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन आरोप है कि कई किसानों ने अपने गांव से काफी दूर स्थित एक ही दुकान से पंप खरीदे। शिकायत में मेसर्स निर्मला इंटरप्राइजेज, अंबिकापुर का उल्लेख करते हुए खरीद प्रक्रिया और भुगतान की जांच की मांग की गई है।शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि अलग-अलग गांवों के किसानों ने एक ही वेंडर से खरीदारी क्यों की और क्या इस प्रक्रिया में किसानों को स्वतंत्र विकल्प मिला था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पुराने कुओं को नया बताकर सब्सिडी लेने का आरोप
शिकायत में ग्राम अनिरुद्धपुर का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद कुओं की मरम्मत या प्लास्टर कर उन्हें नया कूप निर्माण दर्शाया गया और योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लिया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ मामलों में किसानों को कूप निर्माण के लिए अपेक्षित राशि या सामग्री का लाभ नहीं मिला। उन्होंने संबंधित स्थलों का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
गरीब किसानों के नाम पर फर्जी बिलिंग का संदेह
शिकायत पत्र में कूप निर्माण और पंप स्थापना पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ मामलों में प्रति किसान लगभग 1.03 लाख रुपये से लेकर 1.77 लाख रुपये तक खर्च दर्शाए जाने का उल्लेख है।
उन्होंने आशंका जताई है कि सामग्री और मजदूरी के नाम पर कागजों में अधिक खर्च दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया हो सकता है। शिकायत में इस पूरे मामले का वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की गई है।
भौतिक सत्यापन रिपोर्ट पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भौतिक सत्यापन से संबंधित दस्तावेजों में पंप के सीरियल नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज नहीं हैं। इसके अलावा, कुछ किसानों के सत्यापन विवरण एक ही तारीख पर तैयार किए जाने का दावा भी किया गया है।
शिकायत में इन बिंदुओं को संदिग्ध बताते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की गई है।

कलेक्टर से किया तीन प्रमुख मांगें

उत्तम कुमार मिर्ली ने कलेक्टर को सौंपे शिकायत पत्र में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं
संयुक्त जांच दल का गठन: कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा राजस्व विभाग के एसडीएम या तहसीलदार के नेतृत्व में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मौके पर भौतिक सत्यापन ग्राम अनिरुद्धपुर सहित संबंधित गांवों में जाकर कूप निर्माण, पंप स्थापना और लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
भुगतान पर रोक और एफआईआर की मांग जांच पूरी होने तक संबंधित वेंडर के भुगतान पर रोक लगाने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविकता
शाकंभरी योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करना है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता के आरोप सामने आना गंभीर विषय है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की जांच, मौके पर भौतिक सत्यापन और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही हो सकेगी।
अब देखना होगा कि खबर लिखने के बाद जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच में किसानों के हितों से जुड़े इन आरोपों की वास्तविकता क्या सामने आती है।

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