सूरजपुर के लिए पहले ही हो चुके थे कार्यमुक्त, फिर बलरामपुर जिला अस्पताल में पदस्थापना का आधार क्या? जांच पूरी होने से पहले जारी आदेश ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
बलरामपुर@ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में आयुष्मान भारत योजना की राशि के उपयोग को लेकर सामने आई लगभग 1.62 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अभी जांच के दायरे में बताया जा रहा है। इसी बीच डॉ. रामप्रसाद तिर्की को बलरामपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ किए जाने से जुड़ा प्रशासनिक आदेश चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि जब डॉ. तिर्की को पहले ही राजपुर से कार्यमुक्त कर सूरजपुर जिले के लिए स्थानांतरित किया जा चुका था, तो फिर उन्हें बलरामपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन का प्रभार किस आधार पर सौंपा गया?
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलरामपुर की ओर से 12 जनवरी 2026 को जारी आदेश में डॉ. रामप्रसाद तिर्की, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर का उल्लेख करते हुए उन्हें जिला सूरजपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिहारपुर में पदस्थ किए जाने संबंधी आदेश का हवाला दिया गया है। इसी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सूरजपुर के समक्ष उपस्थिति देने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसे में अब जिला अस्पताल बलरामपुर में सिविल सर्जन के पद पर उनकी पदस्थापना और प्रभार को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में नए आदेश का विधिक आधार, संबंधित पद की स्वीकृति और प्रभार सौंपने की प्रक्रिया स्पष्ट होना आवश्यक है।
1.62 करोड़ की कथित अनियमितता की जांच के बीच पदस्थापना पर सवाल
राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान भारत योजना की राशि के उपयोग को लेकर लगभग 1.62 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों और एजी ऑडिट में आपत्तियों के दावों के आधार पर खरीद, भुगतान और निर्माण कार्यों से संबंधित वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए गए हैं।बताया जा रहा है कि मामला वर्ष 2022 से 2025 के बीच के वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। हालांकि, कथित अनियमितता की वास्तविक स्थिति, ऑडिट में दर्ज आपत्तियों का स्वरूप और विभागीय जांच का निष्कर्ष आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना जरूरी है। केवल आरोप या ऑडिट आपत्ति के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।इसी बीच संबंधित अधिकारी को जिला अस्पताल में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी दिए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या राजपुर प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है? यदि जांच लंबित है, तो पदस्थापना के दौरान किन प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया गया?
सूरजपुर के लिए कार्यमुक्त, फिर बलरामपुर में पदस्थापना किस आधार पर?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु डॉ. रामप्रसाद तिर्की से संबंधित प्रशासनिक आदेशों की समय-क्रम के अनुसार जांच है। उपलब्ध दस्तावेज में उन्हें सूरजपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिहारपुर में पदस्थ किए जाने तथा राजपुर से कार्यमुक्त किए जाने का उल्लेख है।
इसके बाद बलरामपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के पद पर उनकी पदस्थापना या प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
मुख्य सवाल यह है कि क्या बलरामपुर जिला अस्पताल में पदस्थापना के लिए शासन या सक्षम प्राधिकारी का अलग आदेश जारी हुआ था? यदि ऐसा आदेश जारी किया गया है, तो उसकी तारीख, शर्तें और प्रशासनिक आधार सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित अधिकारी को सिविल सर्जन का नियमित प्रभार दिया गया है या अस्थायी रूप से अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों स्थितियों में लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
छोटे पद से बड़े प्रशासनिक दायित्व तक, प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी
स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापना और प्रभार सौंपने की प्रक्रिया केवल कार्यालयीन आदेश जारी करने तक सीमित नहीं होती। इसके लिए पद की स्वीकृति, पात्रता, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और लागू सेवा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है।
ऐसे में विकासखंड स्तर पर चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे अधिकारी को जिला अस्पताल में सिविल सर्जन की जिम्मेदारी सौंपे जाने के मामले में विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्णय किन नियमों और परिस्थितियों के आधार पर लिया गया।
यदि इस संबंध में शासन का विधिवत आदेश उपलब्ध है, तो उसे सार्वजनिक करने से उठ रहे सवालों का समाधान हो सकता है। वहीं, यदि आदेशों के बीच कोई विसंगति है, तो उसकी प्रशासनिक जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जिला अस्पताल की जिम्मेदारी और मरीजों का हित
बलरामपुर जिला अस्पताल जिले के हजारों मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां प्रशासनिक नेतृत्व, चिकित्सा सेवाओं का संचालन, कर्मचारियों के बीच समन्वय और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
ऐसे में सिविल सर्जन के पद पर पदस्थापना को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है। मामला किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता के विश्वास का है।
यदि राजपुर में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच जारी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक होनी चाहिए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारी की नई पदस्थापना का जांच से कोई संबंध है या यह पूरी तरह अलग प्रशासनिक निर्णय है।
विभाग से जवाब मांगते तीन अहम सवाल
1. राजपुर प्रकरण की जांच कहां तक पहुंची?
आयुष्मान भारत योजना की राशि से संबंधित लगभग 1.62 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के मामले में एजी ऑडिट की आपत्तियां क्या हैं और विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
2. सूरजपुर के लिए कार्यमुक्त अधिकारी को बलरामपुर में किस आधार पर पदस्थ किया गया?
क्या डॉ. रामप्रसाद तिर्की को सिविल सर्जन का प्रभार देने के लिए शासन या सक्षम प्राधिकारी का अलग आदेश जारी हुआ है? यदि हां, तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
3. सिविल सर्जन का प्रभार देने में किन नियमों का पालन हुआ?
क्या यह नियमित पदस्थापना है या अस्थायी प्रभार? संबंधित पद की स्वीकृति और प्रभार सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया क्या है?














