बलरामपुर-रामानुजगंज@ विजय सिंह {ब्युरो}सरकार कहती है,हर गरीब के सिर पर पक्की छत होगी। लेकिन रामचंद्रपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चाकी से सामने आई शिकायतें इस दावे की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।[metaslider id=1166]
यह कहानी सिर्फ 27 हितग्राहियों की नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जिसके भरोसे गरीब अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना,अपना पक्का घर देखता है।
👉किसी के घर में बारिश टपकती रही, किसी के खाते में पहुंच गई आवास की रकम
ग्रामीणों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास की करीब ₹1.20 लाख की राशि के साथ मनरेगा मजदूरी की लगभग ₹24 हजार की राशि में भी कथित हेरफेर की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ हितग्राहियों की रकम दूसरे शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों के खातों में भेजी गई, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं बताया जा रहा है।
👉सोचिए… जिस परिवार ने अपने बच्चों के लिए पक्की छत का सपना देखा था, जिसके लिए सरकारी आवास की रकम उम्मीद की आखिरी किरण थी, अगर वही पैसा किसी और के खाते में चला जाए तो उस परिवार पर क्या गुजरती होगी
👉गरीब के नाम पर पैसा निकला, लेकिन गरीब के घर की ईंट तक नहीं लगी!
जिस परिवार ने सरकारी सूची में अपना नाम देखकर सोचा होगा कि अब बारिश में बच्चों को बचाने के लिए छत नहीं तलाशनी पड़ेगी…
👉जिस मां ने सोचा होगा कि अब उसके बच्चों की रात टपकती छत के नीचे नहीं कटेगी…
👉जिस बुजुर्ग ने सोचा होगा कि जिंदगी के आखिरी पड़ाव में कम से कम अपना पक्का घर होगा…
👉अगर उसी घर की रकम किसी दूसरे खाते में चली जाए, तो उस गरीब के दर्द का हिसाब कौन देगा?
👉शिकायत दर शिकायत… फिर भी कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि मामले की शिकायत जनपद पंचायत से लेकर जिला पंचायत और कलेक्टर जनदर्शन तक की गई। बावजूद इसके ग्रामीणों को लंबे समय तक ठोस कार्रवाई का इंतजार करना पड़ा।
👉यहां सवाल सिर्फ पैसा कहां गया, इसका नहीं है।
👉सवाल यह भी है कि सरकारी योजना की निगरानी कौन कर रहा था?
👉हितग्राही के नाम पर भुगतान किसने सत्यापित किया?
👉बैंक खाते की जांच किस स्तर पर हुई?
👉और अगर गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मंत्री के सामने पहुंचा मामला तो हिली व्यवस्था
जब ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के सामने अपनी पीड़ा रखी तो मामले ने फिर जोर पकड़ा। मंत्री ने अधिकारियों के सामने नाराजगी जाहिर करते हुए गरीबों के हक से खिलवाड़ को गंभीर विषय बताया और सख्त कार्रवाई की बात कहीअब प्रशासन के सामने असली परीक्षा है।क्या सिर्फ जांच रिपोर्ट भेजकर मामला बंद हो जाएगा?या फिर उस-उस खाते तक जांच पहुंचेगी, जहां गरीबों के नाम की रकम पहुंचने का आरोप है?
27 नाम सामने आए हैं, जांच पूरी पंचायत की क्यों नहीं?
ग्रामीणों की मांग है कि सिर्फ 27 मामलों की जांच कर खानापूर्ति न की जाए। चाकी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के हर हितग्राही, हर भुगतान, हर बैंक खाते, मनरेगा मजदूरी और आवास निर्माण की जमीनी स्थिति का मिलान कराया जाए।क्योंकि अगर एक गरीब का हक गलत खाते में गया है, तो यह सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं,पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल है।
सीईओ बोले,जांच पूरी कर , रिपोर्ट उच्च कार्यालय भेजी गई है..
रामचंद्रपुर जनपद पंचायत के सीईओ रणवीर साय के अनुसार मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों/उच्च कार्यालय को भेज दी गई है।अब गरीबों की नजर रिपोर्ट पर नहीं, नतीजे पर है।उन्हें कागज नहीं चाहिए।उन्हें आश्वासन नहीं चाहिए।उन्हें सिर्फ अपना हक और अपने सिर पर पक्की छत चाहिए।क्योंकि गरीब की उम्मीद से बड़ा कोई सरकारी आंकड़ा नहीं होता…और गरीब के हक से बड़ा कोई सरकारी दावा नहीं।अब देखना यह है कि चाकी के इन परिवारों को इंसाफ मिलता है या फिर उनकी शिकायत भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती है















