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प्रधानमंत्री अवास योजना का घर पर सरकारी दावे की दो तस्वीर! रिकॉर्ड में पूर्ण, जनपद में निर्माणाधीन..

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बलरामपुर@ {शंकरगढ़ }गरीब परिवारों को पक्की छत देने और बारिश में उनके घरों से पानी टपकने की समस्या खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की है। लेकिन बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के अमेरा गांव में सामने आया मामला इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आरोप है कि पुराने अधूरे मकान को दिखाकर और किसी अन्य व्यक्ति के घर की तस्वीर का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री आवास की राशि का आहरण कर लिया गया। इतना ही नहीं, शासन के रिकॉर्ड में आवास को पूर्ण भी दर्शा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में रोजगार सहायक की भूमिका संदिग्ध है और उसके द्वारा ही राशि का आहरण किया गया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब अमेरा गांव निवासी संजय यादव ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद भी मामले में जिस तरह की कार्रवाई सामने आई, उसने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

 


शिकायत के जवाब में शंकरगढ़ जनपद पंचायत की सीईओ की ओर से बताया गया कि पूनम यादव और रामगहन यादव के प्रधानमंत्री आवास में लेटरिंग का कार्य चल रहा है और जल्द कार्य पूर्ण करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभागीय वेबसाइट के रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री आवास को पूर्ण दर्शाया जा चुका है, तो जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी उसी आवास को निर्माणाधीन कैसे बता रहे हैं? आखिर सरकारी रिकॉर्ड में एक ही आवास की दो अलग-अलग तस्वीरें क्यों दिखाई दे रही हैं?

क्या ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवास को पूर्ण दिखाकर राशि का आहरणकर लिया गया?क्या जमीनी स्तर पर आवास वास्तव में बनाही नहीं?और यदि किसी दूसरे के मकान की तस्वीर लगाकर आवास पूर्ण दिखाया गया है, तो उस तस्वीर का सत्यापन किस अधिकारी ने किया?

यह मामला सिर्फ एक आवास का नहीं, बल्कि उस गरीब परिवार के हक और सरकारी योजना की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है, जिसके लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। गरीब को पक्की छत देने वाली योजना में यदि कागजों पर ही मकान खड़े हो जाएं और जमीन पर अधूरे घर बारिश में भीगते रहें, तो फिर योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

अब नजरें जिले के उच्च अधिकारियों पर हैं। देखना होगा कि मामले की जमीनी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या फिर नोटिस जारी कर कार्रवाई का कोरम पूरा करते हुए मामला फाइलों में दबा दिया जाता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस मामले में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का निष्पक्ष मिलान कर दोषियों पर कार्रवाई होगी और सरकारी राशि की वास्तविक स्थिति भी सामने आएगी।

 

👉सवाल बड़ा है..गरीब के नाम पर स्वीकृत आवास अगर कागजों में ही पूरा हो गया, तो उसकी पक्की छत आखिर जमीन पर कब बनेगी?

👉और  जब इस मामले पर बलरामपुर  जिले के जिला कलेक्टर से बात किया गया तो कलेक्टर ने कहा की ईस तरह का मामले  अभी हमारे संज्ञान मे आया है संबंधित को निर्देशित कर जांच कराते  और अगर इस तरह मामला है तो दोषियों के उचित कारवाही किया जाएगा और अग जनपद सिईओ कि भी गडबडी सामने आती है सिईओ के उपर भी कारवाही किया जाएगा

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