बलरामपुर जिले में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा राजपुर थाना क्षेत्र के सेवारी के पास मुख्य मार्ग पर रात करीब 2 बजे हुआ।
जानकारी के मुताबिक पिकअप वाहन में 10 मजदूर सवार थे, जो टमाटर की खेती के काम के लिए शंकरगढ़ जा रहे थे। इसी दौरान पिकअप की एक ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीन मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं सात घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें उपचार के लिए अंबिकापुर रेफर किया गया है।
बताया जा रहा है कि सभी मजदूर सूरजपुर जिले के नरोला गांव के रहने वाले हैं।
आखिर जिम्मेदार कौन?
मालवाहक वाहनों में सवारी ढोने पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग और प्रशासन की ओर से समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। बावजूद इसके ग्रामीण क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों में मजदूरों की आवाजाही का सिलसिला जारी है।
सवाल यह है कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? अगर मालवाहक वाहनों में सवारी ढुलाई के खिलाफ नियमित और सख्त कार्रवाई होती, तो क्या इस तरह की दर्दनाक घटना को टाला जा सकता था?
तीन परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया और सात मजदूर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि मालवाहक में सवारी ढुलाई पर रोक लगाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और इस हादसे के लिए जवाबदेही तय कब होगी?















