बलरामपुर{शंकरगढ़} प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने की योजना के बीच बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत अमेरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने योजना की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक ही परिवार के नाम पर अलग-अलग जिलों में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराकर योजना का लाभ लिया जा रहा है।
शंकरगढ़ जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई शिकायत में आवेदक राजू यादव, पिता कामेश्वर यादव के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक राजू यादव का संबंध ग्राम अमेरा, जनपद पंचायत शंकरगढ़, जिला बलरामपुर से बताया गया है। दस्तावेजों में अमेरा पंचायत के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राही राजू के नाम पर आवास स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत में दूसरी ओर राजू यादव की पत्नी विद्यावती यादव के नाम पर जिला जशपुर, विकासखंड बगीचा की ग्राम पंचायत महनई में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने का आरोप लगाया गया है। उपलब्ध दस्तावेज में विद्यावती यादव के पति/पिता के कॉलम में कामेश्वर नाम दर्ज दिखाई दे रहा है। वहीं बलरामपुर जिले के अमेरा से संबंधित दस्तावेज में राजू के पिता/पति के कॉलम में भी कामेश्वर नाम दर्ज है।
👉दस्तावेजों में क्या सामने आया?
PMAY के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत खड़कोना, ग्राम अमेरा में राजू (CH145522828) के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत दिखाई देता है। रिकॉर्ड में योजना के तहत 1,20,000 रुपये की यूनिट सहायता स्वीकृत होने की जानकारी दर्ज है। वहीं किस्त के रूप में 40,000 रुपये जारी होने का रिकॉर्ड भी दिखाई देता है।
दूसरी ओर जशपुर जिले के बगीचा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत महनई में विद्यावती यादव(CH115099261) के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने का रिकॉर्ड सामने आया है। इस रिकॉर्ड में भी योजना के तहत 1,20,000 रुपये की सहायता स्वीकृत दिखाई देती है और 40 हजार रुपये की पहली किस्त जारी होने की जानकारी दर्ज है।
👉पति के नाम की जगह पिता/ससुर का नाम दर्ज होने का आरोप
शिकायत में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि विद्यावती यादव के रिकॉर्ड में पति के स्थान पर कामेश्वर का नाम दर्ज है, जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति का नाम राजू यादव होना चाहिए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस तरह रिकॉर्ड में पिता/ससुर का नाम दर्ज कराकर अलग स्थान पर प्रधानमंत्री आवास का लाभ लिया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित हितग्राही द्वारा अलग-अलग स्थानों पर राशन कार्ड सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की बात सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
👉जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी सच्चाई
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों स्थानों पर दर्ज हितग्राही वास्तव में एक ही परिवार से संबंधित हैं? क्या दोनों आवासों के लिए पात्रता का अलग-अलग सत्यापन हुआ था? पति-पत्नी के रिकॉर्ड में अलग नाम क्यों दर्ज है? और यदि एक ही परिवार ने दो स्थानों से प्रधानमंत्री आवास का लाभ लिया है, तो इसका सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
शिकायत के बाद पूरे मामले की दस्तावेजी जांच, आधार/परिवार आईडी, राशन कार्ड, निवास रिकॉर्ड और PMAY पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान किया जाना जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला रिकॉर्ड की त्रुटि है, गलत जानकारी के आधार पर स्वीकृति का है या वास्तव में एक ही परिवार द्वारा दो स्थानों से योजना का लाभ लिया गया है।
👉रिकॉर्ड में पति-पिता का उलझा खेल, दो जिलों में आवास की स्वीकृति!
👉आवास योजना का अजब खेल! पति-पत्नी के नाम अलग-अलग जिलों में मकान
👉बलरामपुर जिले से जिला जशपुर तक PM आवास की कहानी, दस्तावेजों ने खड़े किए कई सवाल
👉एक परिवार, दो पंचायत, दो आवास… क्या सिस्टम की आंखों में धूल?
👉PM आवास में ‘डबल लाभ’ का आरोप, शिकायत के बाद मचा हड़कंप
👉फिलहाल शिकायत और सामने आए दस्तावेजों ने प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता जांच और जमीनी सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।















