बलरामपुर,@सरकारी स्कूलों में बच्चों को रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक (ट्रेनर) अब अपनी ही समस्याओं को लेकर हताश नजर आ रहे हैं। वर्षों से स्कूलों में सेवाएं देने के बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने, बिना भुगतान ड्यूटी करने और नौकरी की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच प्रशिक्षक आखिरकार अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर के पास पहुंचे।
छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा सामने रखी। संघ ने 16 सूत्रीय मांगों के माध्यम से लंबित मानदेय, सेवा सुरक्षा, मानदेय वृद्धि और कार्य व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की है।
बिना वेतन ड्यूटी, फिर भी बच्चों की पढ़ाई जारी…
प्रशिक्षकों का कहना है कि वे सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दे रहे हैं। विभागीय एवं शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद मानदेय समय पर नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।संघ के बताने अनुसार करीब 1,029 व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मई एवं जून माह का मानदेय लंबित है। ऐसे में प्रशिक्षकों के सामने सवाल है कि जब घर चलाने के लिए वेतन जरूरी है, तो आखिर कब तक बिना भुगतान के ड्यूटी करनी पड़ेगी?
10 साल से सेवा, लेकिन भविष्य अब भी असुरक्षित
संघ के अनुसार वर्ष 2014 से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है और वर्तमान में करीब 1,285 विद्यालयों में विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इसके बावजूद प्रशिक्षकों को नौकरी की स्थिरता और सेवा सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। संघ ने आरोप लगाया कि हाल ही में चार प्रशिक्षकों को सेवा से पृथक किए जाने से असुरक्षा की भावना और बढ़ी है।
₹38,100 मानदेय की मांग
संघ ने हरियाणा एवं दिल्ली की तर्ज पर व्यावसायिक प्रशिक्षकों का मानदेय ₹38,100 प्रतिमाह किए जाने की मांग रखी है।साथ ही PAB 2025-26 के तहत स्वीकृत मानदेय वृद्धि के अनुसार ₹12,000 वार्षिक एरियर्स का भुगतान तथा PAB 2026-27 में स्वीकृत राशि के अनुरूप पूर्ण मानदेय देने की मांग भी की गई है।
121 हेल्थ केयर प्रशिक्षकों का मानदेय घटाने पर आपत्ति
ज्ञापन में नई निविदा प्रक्रिया के तहत 121 अनुभवी हेल्थ केयर प्रशिक्षकों के मानदेय में कथित कमी का मुद्दा भी उठाया गया है। संघ के अनुसार पहले ₹23,000 प्रतिमाह मानदेय मिलने की तुलना में इसे ₹20,000 किए जाने से प्रशिक्षकों में नाराजगी है।
ट्रेनरों का सवाल हमारा भविष्य कौन सुरक्षित करेगा?
व्यावसायिक प्रशिक्षक बच्चों को हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। लेकिन जब यही प्रशिक्षक खुद मानदेय के लिए परेशान हों, महीनों भुगतान का इंतजार करें और नौकरी की सुरक्षा को लेकर आशंकित रहें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।हताश होकर कलेक्टर के पास पहुंचे प्रशिक्षकों की मांग अब सिर्फ मानदेय की नहीं, बल्कि सम्मान, स्थिरता और सुरक्षित भविष्य की भी है।
अब सबकी आस प्रशासन और शासन पर हैं कि इन प्रशिक्षकों की पुकार कब सुनी जाएगी और बिना वेतन ड्यूटी जैसी स्थिति से उन्हें कब राहत मिलेगी।1,029 प्रशिक्षकों के मई-जून के मानदेय नही , नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन की मांग; 16 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर लगाई गुहार















